जब पहला क़दम लड़खड़ाया होगा इशारा तो तभी मिल गया था कि यहाँ बिन गिरे कोई नही उठता।
जब बिना अर्थ वाले पहले लफ्ज़ मुह से निकले, इशारा तो तब भी मिला कि यहाँ लोग तुम्हे समझ जाएं ये मुमकीन नही।
जब कभी रो रो कर खुद चुप हुए, इशारा तब भी मिला कि हर पल कोई तुम्हारे साथ हो ये मुमकीन नही।
जिंदगी ने हर पल हमें सिख दी है, जिंदगी जीने का फलसफा सिखाया है पर अफसोस कि हम सब समझते हुए भी नासमझ ही रहे।
जब तुम अपने दुःख में भी होंठो पे मुस्कुराहट लाने की और दूसरों की बुराई में भी अच्छाई ढूंढ निकालने का हुनर सिख लो,
जब अपनी इक्षाओं की पूर्ति ना होने पर भी जो जो रहा हो उसमे सच्चे मन से सम्मिलित होना सिख लो,
जब हर सिक्कें के दो पहलु का होना स्वीकार कर लो समझ लो उस दिन तुमने जिंदगी को जीना सीख लिया।
और जिस दिन कोई तुम्हारी हँसी के पीछे छिपे दर्द और होठों की मुस्कुराहट के पीछे छिपे रूंधे हुए गले की सिसकिया गिन जाए,
जिस दिन कोई तुम्हारे बिन बतायें ही तुम्हे तुम्हारे दिल का हाल बता दे, और जिस दिन कोई तुम्हारे टूटे हुए हर सपनें को जोड़कर तुम्हें एक नई उम्मीद नज़र करे उस दिन समझो तुम्हारी जिंदगी ने तुम्हे ढूंढ लिया।
जिंदगी सबको कहाँ ढूंढ पाती है। यहाँ उम्र बीत जाती है खुद को ढूंढने में और अंतिम सफ़र पे सब अकेले ही होते है।
जीवन सिर्फ एक सिख है। जो हर कदम पर हमसे रूबरू होती है, ओर मृत्यु हमारी मंजिल जो आसानी से नहीं मिलती।
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